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17 Jul 2025 · 1 min read

आकांक्षा का आसमान

आशाओं के पथ पर
चंद्र-सूर्य बनकर
खुद ही उजास हो जाना।

जब तक जीवन की साँझ रहे,
खुद का मूल्य समझना,
खुद का हमसफ़र बनना।

खुद से अपेक्षा रखना ही
स्वतंत्रता की पराकाष्ठा है।

अकेले नाप लेना —
दुखों का पहाड़ हो
या गहराई समुंदर की।

पुकारना मत,
चाहे कोई
कितना भी ख़ास क्यों न हो।
जो आएंगे,
वो तमाशा ही देखने आएंगे।
अपने सपनों के पंख
खुद ही बन जाना,
आकांक्षा के आसमान
को और ऊँचा करना।

मत उलझो
मोह के मायाजाल में।

कर लो खुद को मुक्त
हर बंधन से —
फिर जीवन के कैनवास पर
जो चाहो, रंग भर देना।
✍️ दुष्यंत कुमार पटेल

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