आज फिर आंखों में नमी सी है
हर इक जगह तेरी कमी सी है
आज फिर आंखों में नमी सी है
गुजरा जमाना उदास कर देता है
कुछ पलो को खास कर देता है
वक्त का पहिया घूमता है ऐसा
दूर को भी अपने पास कर देता हैं
मेरे दिल की धड़कन थमी सी है
आज फिर आंखों में नमी सी है।
बर्षा बादल का साथ छोड़ देती हैं
नदियों की धारा को मोड़ देती है
उसका प्रवाह इतना प्रचंड है
रास्ते के पत्थरों को तोड़ देती है
मेरा हाल सहने वाली जमीं सी है
आज फिर आंखों में नमी सी है।
कुछ भी यहां टिकने वाला नहीं है
दिल का दाग़ मिटने वाला नहीं है
गम का बोझ लिए मारे फिरते हैं
अंदर का दर्द दिखने वाला नहीं है
गमों में मुस्कुराना लाजमी सी है
आज फिर आंखों में नमी सी है ।
नूर फातिमा खातून “नूरी”
जिला -कुशीनगर