छोड़ दिया
छोड़ दिया
हंसना छोड़ रो रहा इंसान
अपने सुख से सुखी नहीं
दूसरे सुख से दुःखी है जन
दूजे दुख में क्यों हंस रहे हो
बेवफाई के जटिल जवाने में
लूट मार से भ्रमित दुनियाँ में
सत्य अहिंसा करुणा दया
मिलना जुलना हंसी बोल
छोड़ क्यों रक्त चाप बढ़ा रहे
दुःख सुख तो आनी जानी
गरीबी अमीरी दूरी मिटानी
क्योंकि :
सबका है खून एक समान ।
टी .पी . तरुण