Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
16 Jul 2025 · 1 min read

मैं लोगों को समझाना चाहता हूँ

मैं लोगों को समझाना चाहता हूँ,
कि हमारे मन-मष्तिष्क,
और हाथों से ऐसा न हो,
कि जिसको सुधारने में,
लग जाये करोड़ों वर्ष।

मैं लोगों को समझाना चाहता हूँ,
कि खर्च कुछ नहीं करना है,
सिर्फ बदलनी है हमको,
हमारी जीवनशैली जीने की,
जिससे कि पैदा हो,
हमारे वातावरण में एक महक।

मैं लोगों को समझाना चाहता हूँ,
कि तुम रोज प्रार्थना करते हो,
रोशनी का रोज दीप जलाते हो,
और यह सूरज कभी अस्त नहीं हो,
कुछ कर्म हमको ऐसे करने हैं।

मैं लोगों को समझाना चाहता हूँ,
कि मैं जी रहा हूँ गुलामों की जिंदगी,
बदनामी मेरा दामन नहीं छोड़ती,
बदनामी तुम्हारी नहीं हो,
तू दुनिया से नाराज नहीं हो,
हर चिंता से तू निश्चिंत हो।

मैं लोगों को समझाना चाहता हूँ कि—————–।।

शिक्षक एवं साहित्यकार
गुरुदीन वर्मा उर्फ़ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)

Loading...