उपकार -गीत
कर लो कुछ उपकार बुजुर्गों कर लो कुछ उपकार।
ना रोज़गार ना शादी है बच्चे हैं बेजा़र । बुजुर्गों कर लो कुछ उपकार ।
२० में अपनी शादी हो गयी आनन्द बे शुमार ।
४५ तक चले गृहस्ती फिर पड़ते बीमार ।
७० के हो चले अगाडी़ छूटा सब संसार ।
बुजुर्गों कर लो कुछ उपकार ।
पढ़ते -लिखते ३० गुजर गयी कार बिना बेकार ।
किसी को राजकुमारी चाहिए किसी को राजकुमार ।
शादी के इन्तजार में बच्चे हो गये ३५ पार ।
बुजुर्गो कर लो कुछ उपकार ।
इसीलिए तो युवक युवतियां शादी से कतराते ।
घर से बाहर मौज भतेरी ना रिश्तों में बंध पावें ।
बच्चों के पालन-पोषण का कौन उठावें भार ।
बुजुर्गो कर लो कुछ उपकार ।