मेरा इंतज़ार मत करना
ग़ज़ल 1212 1122 1212 22
जवानी की हवा को अश्क बार मत करना,
हवस की गलियों में आंखें निसार मत करना ।
भले कभी किसी दुश्मन से हार जाओ तुम,
मगर कभी भी तू पीछे से वार मत करना।
हो थोड़ी थोड़ी मुहब्बत ही अपने लोगों से,
बहुत जियादा किसी से भी प्यार मत करना।
भले बुलाए वो उस पार कितना भी दानी,
मगर नशे के समंदर को पार मत करना।
भरोसे पे टिका है अपने रिश्तों की दुनिया,
कभी किसी की वफ़ा का शिकार मत करना।
यहाँ रहम कोई कमजोरों पे नहीं करता,
जिगर का हौसला तुम भी फ़रार मत करना।
सफल हुआ तो ही मैं अपने गांव लौटूंगा,
मैं जा रहा हूँ मेरा इंतज़ार मत करना।
( डॉ संजय दानी दुर्ग )