दोहा पंचक. . . . . बारिश
दोहा पंचक. . . . . बारिश
बारिश की बूँदें करें, तन पर बड़ा कमाल ।
भीगी सजनी देखे कर, साजन हुए निहाल ।।
सुर्ख कपोलों पर रुकी,जब बारिश की बूँद ।
बाहुबंध में खो गई, सजनी आँखें मूँद ।
मृग शावक सी चाल पर , वर्षा देती ताल ।
अंग- अंग भीगा लगे, ज्योँ छंदों का जाल ।।
मुक्ता सी बौछार के, अद्भुत होते रंग ।
भीगे यौवन से करें, कामुक नजरें जंग ।।
अलहड़ यौवन मद भरा, चलता भीगी चाल ।
ऐसा लगता वृष्टि से, झुकी हुई हो डाल ।।
सुशील सरना / 15-7-25