मुस्कुरा कर गम उठाया जा रहा है
2122. 2122 2122
जैसे -तैसे पल बिताया जा रहा है
मुस्कुरा कर गम उठाया जा रहा है ।
रखते हैं मन साफ चालाकी क्या जाने
मीठा-मीठा विष पिलाया जा रहा है।
जो कभी हमराज थे अपने मित्रों में
उन्हीं से उंगली उठाया जा रहा है।
सच से पर्दा उठने ना पाए कभी भी
सच्चे को झूठा बनाया जा रहा है।
खाकर नस्लें बेईमानी सीख लेंगी
कैसा ये रोटी कमाया जा रहा है।
मेरे नाकामी को अनुभव कराकर
सब्र मेरा आजमाया जा रहा है।
अपनों को छोड़ा है तन्हा उसने “नूरी”
गैर को गले से लगाया जा रहा है।
नूर फातिमा खातून “नूरी ”
जिला -कुशीनगर