तुम्हारे होठों से हंसी चुरा लूँ
तुम्हारे होठों से हंसी चुरा लूँ
तो कैसा रहेगा….
तुम्हारे राज़ सर-ए- बाज़ार उछालूँ
तो कैसा रहेगा…
औरो से मेरी शिकायतें करते फिरते हो,
मैं तुम पे तोहमत लगाऊं
तो कैसा रहेगा…।।
मधु गुप्ता “अपराजिता”
तुम्हारे होठों से हंसी चुरा लूँ
तो कैसा रहेगा….
तुम्हारे राज़ सर-ए- बाज़ार उछालूँ
तो कैसा रहेगा…
औरो से मेरी शिकायतें करते फिरते हो,
मैं तुम पे तोहमत लगाऊं
तो कैसा रहेगा…।।
मधु गुप्ता “अपराजिता”