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15 Jul 2025 · 1 min read

तुम्हारे होठों से हंसी चुरा लूँ

तुम्हारे होठों से हंसी चुरा लूँ
तो कैसा रहेगा….
तुम्हारे राज़ सर-ए- बाज़ार उछालूँ
तो कैसा रहेगा…
औरो से मेरी शिकायतें करते फिरते हो,
मैं तुम पे तोहमत लगाऊं
तो कैसा रहेगा…।।
मधु गुप्ता “अपराजिता”

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