मां का अहसास
नन्हा पांव लिए आंगन में जब चलते थे
तूने हाथ थामा फिर हम गिरने से बचते थे
मेरी हरकतों से तू बहुत परेशान थी
लेकिन मेरी हर खुशी तू हकदार थी
घर के हजार कामों में तू उलझी थी
फिर सब कैसे कर लेती थी
कहा से इतनी ताकत लाती हो
पूरे घर को संजो के रखती हो
एक दिन नहीं चलता तेरे बिना
कैसे संभालती हो ये जहां
कैसे कर लेती हो इतना कुछ
बिना किए शिकायत कुछ
मां तेरी याद आती हैं
लेकिन तुझे कुछ बता नहीं पाते हैं
तुम भी तो सारी परेशानियां छुपाती हो
क्या तकलीफ है कभी नहीं बताती हो
वादा तुमसे करते हैं
सब कुछ बदल के रख देंगे
तेरे कदमों में एक दिन
दुनिया की खुशी रख देंगे