*साम्ब षट्पदी---*
साम्ब षट्पदी—
15/07/2024
(1)- प्रथम-तृतीय तथा चतुर्थ-षष्ठम तुकांत
पटरानी।
सब देख रहे,
जाती रोज लेने पानी।।
राजा नौकर बना फिरता।
लोकतांत्रिक व्यवस्था का जादू,
समूह संग कटघरे में है दिखता।।
(2)- प्रथम-द्वितीय, तृतीय-चतुर्थ, पंचम-षष्ठम तुकांत
परेशानी।
ये है मेरे नानी।
मेरे घर में ही रहे।
जीवन के सब मर्म कहे।।
सिखलाती मुझे नयी कहानियां।
देकर जाती हैं समय की निशानियां।।
(3)- द्वितीय-चतुर्थ तथा षष्ठम, प्रथम तुकांत
बलिदानी।
जिसने भी दिया।
आज उपेक्षित दिखे,
चापलूसों ने ही राज किया।।
आतंकियों के इतिहास बने हैं,
सेनानियों की दफ्न हुई सब कहानी।।
— डॉ. रामनाथ साहू “ननकी”
संस्थापक, छंदाचार्य
(बिलासा छंद महालय, छत्तीसगढ़)
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