छप्पय छंद
छंद विधान-(1 रोला छंद+1 उल्लाला छंद=छप्पय
छंद)
जाति-पाॅंति का खेल, सभी रिश्तों पर भारी।
खेल रहे कुछ लोग, खेल सड़कों पर जारी ।
किसकी जाति श्रेष्ठ, बड़ी अब यह बीमारी।
संकट बड़ा विशाल, बचाओ हे गिरधारी।
जाति-धर्म का यह जहर, घुलता जाता राज है।
राजनीति की भेंट अब, चढ़ता रोज समाज है।।
~राजकुमार पाल (राज) ✍🏻
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