"स्वनिर्माता – क़लम तुम्हारे हाथ में"
क़लम तुम्हारे हाथ में है, पन्ना अभी कोरा पड़ा है,
जो चाहो तुम लिख सकते हो, जीवन स्वयं तुम्हारा गढ़ा है।
छोटे-से हर निर्णय में ही, भाग्य तुम्हारा पलता है,
हर सोच, हर संघर्ष तुम्हारा, भविष्य नया रचता है।
तू रुक मत जाना राहों में, कठिनाइयाँ तो आएँगी,
पर मन की आग जो जलती है, वो तुझसे पर्वत झुकवाएँगी।
हर हार भी एक सीख बने, हर अश्रु भी इक दीप बने,
बस आगे बढ़, थम मत जाना, ये सपना अब सच्चा बने।
तू नन्हा नहीं, तू शक्ति है, तू स्वप्नों का निर्माण करे,
तू अंधियारे में दीप जले, तू अपना संसार करे।
कल क्या होगा किसे पता, पर आज तेरा अपना है,
क़लम पकड़, अब तय कर ले, पथ कैसा और सपना क्या है।
न तो किस्मत लिखेगी तुझको, न कोई विधि-विधान यहाँ,
जो भी तू चाहे बन सकता है, हो बस तुझमें विश्वास वहाँ।
हर शब्द जो तू अब लिखेगा, वो इतिहास बन जाएगा,
क़लम तुम्हारे हाथ में है, तू खुद अपना लेखक कहलाएगा।