मछली के आँसू
मगरमच्छों के राज में
जल भी डर से काँपता है,
लहरें चुप हैं,
और गहराइयाँ भी मौन।
मछली जब रोती है,
तो आँसू जल में घुल जाते हैं —
किसी ने देखा नहीं,
किसी ने सुना नहीं।
क्योंकि
इस संसार में
दुःख तभी मान्य होता है
जब वह किसी शक्तिशाली का हो।
कमज़ोर की पीड़ा
अक्सर पानी की तरह
बिना रंग, बिना स्वाद,
बिना शोर बह जाती है।
और फिर
इतिहास सिर्फ़ शिकारी का होता है,
शिकार का नहीं।