अभी तक इतना धोखा खाया है मैंने
अभी तक इतना धोखा खाया है मैंने
पुराने जख्मों का भी अब दर्द नहीं
मेरी दीवानगी की हरकतें देख कर
दिखता कहां कोई भी हमदर्द कहीं
पारस नाथ झा
अभी तक इतना धोखा खाया है मैंने
पुराने जख्मों का भी अब दर्द नहीं
मेरी दीवानगी की हरकतें देख कर
दिखता कहां कोई भी हमदर्द कहीं
पारस नाथ झा