गीत समीक्षा
गीत की समीक्षा
हमारे देश मे बहुत से कवि, गीतकार और साहित्यकार हुए है और आज भी बहुत गीतकार है किंतु आज में उनमें से ऐसे गीतकार का जिक्र कर रहा हूँ जो किसी परिचय के मोहताज नही है हां जी मैं बात कर रहा हूँ आदरणीय डाॅ० रामकरण साहू “सजल” बबेरू (बाँदा) उ०प्र० इनकी कई पुस्तक प्रकाशित हो चुकी है । लेकिन मैं आज किसी पुस्तक की बात न करके इनके द्वारा लिखा एक गीत जो मुझको बहुत ही पसंद आया है और उम्मीद करता हूँ आपको भी पसंद आएगा उसकी समीक्षात्मक समीक्षा कर रहा हूँ गीत आपके समक्ष :-
जिसे हम कहते अपनी जान ,
वही है प्यारा हिन्दुस्तान ,
उसी से प्यार हुआ है — २ —–
बहुत शीतल जिसकी तासीर
भव्य सुन्दर जिसकी तस्वीर ,
मधुर पावन उसकी तकरीर
सभी कहते जिसको कश्मीर ,
हमारा मान और सम्मान ,
लाल केशर है जिसकी शान ,
उसी से प्यार हुआ है — २ —–
जहाँ गंगा की पावन धार
बिन्ध हिमगिर का सुन्दर हार ,
राम सीता शंकर का सार
मिला कान्हा के जैसा यार ,
जहाँ कोयल की मधुरिम तान ,
स्वयं गीत का पावन ज्ञान ,
उसी से प्यार हुआ है — २ —–
हमारा दिल दिल्ली है खास
गुलाबी जयपुर आए रास ,
किलेबन्दी में झाँसी पास
सुघरता कलकत्ता की आस ,
जहाँ सरहद पर हँसे जवान ,
स्वयं में गाए गीत किसान ,
उसी से प्यार हुआ है — २ —–
जहाँ चौपाटी पर हो भीड़
करें जैसे हर हरकत रीड़ ,
खड़े भारी दरख़्त हैं चीड़
टँगे हर इक पेड़ों पर नीड़ ,
जहाँ हर फसलों का सम्मान ,
कीर करते मधुरिम गुणगान ,
उसी से प्यार हुआ है — २ —–
बिहँस बाली की हो खन-खन
मधुर पायल करती छन-छन ,
भ्रमर उपवन करता भन-भन
महकता है सबका तन-मन ,
प्रकृति का जिसको है वरदान ,
सुशोभित खेत और खलिहान ,
उसी से प्यार हुआ है — २ —–
उपरोक्त गीत को जब मैंने पढ़ना शुरू किया और पूरा पढ़ा तो खुद जो महसूस किया उन भावनाओ को शब्दों में पिरोहने का प्रयास किया ।” जिसमे हम कहते अपनी जान वही है प्यारा हिन्दुस्तान” एक देशभक्ति गीत, जिसमें भारत की सुंदरता, संस्कृति, और विविधता का वर्णन किया गया है। गीत में कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक, गंगा से लेकर हिमालय तक, और विभिन्न शहरों और त्योहारों का उल्लेख किया गया है।
गीत के बोलों में भारत की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक धरोहर, और लोगों की एकता का उत्सव मनाया गया है। यह गीत देशभक्ति और राष्ट्रीय गौरव की भावना को बढ़ावा देता है ।
इसके अलावा, गीत के मानवीय पहलू में शामिल ल
किया गया है ।
– भावनात्मक जुड़ाव: गीत में भावनात्मक जुड़ाव की भावना को व्यक्त किया गया है ।
– प्रेम और सम्मान: गीत में प्रेम और सम्मान की भावना को व्यक्त किया गया है ।,
– एकता और अखंडता: गीत में एकता और अखंडता की भावना को व्यक्त किया गया है।
गीत के काव्य पहलू का अवलोकन करने से ज्ञात होता है कि:-
1. प्रतीकवाद: गीत में कई प्रतीकों का उपयोग किया गया है, जैसे कि “लाल केशर” जो भारत के प्रतीक हैं।
2. चित्रण: गीत में भारत की सुंदरता और विविधता का चित्रण किया गया है, जैसे कि “भव्य सुन्दर जिसकी तस्वीर”।
3. अलंकार: गीत में कई अलंकारों का उपयोग किया गया है, जैसे कि रूपक, उपमा, अनुप्रास, और वृत्ति।
4. पुनरावृत्ति: गीत में “उसी से प्यार हुआ है” की पुनरावृत्ति की गई है, जो इसके प्रभाव को बढ़ाती है।
5. भावात्मक अभिव्यक्ति: गीत में देशभक्ति और राष्ट्रीय गौरव की भावना को व्यक्त किया गया है।
6. विविधता का वर्णन: गीत में भारत की विविधता का वर्णन किया गया है, जैसे कि विभिन्न शहरों, त्योहारों, और संस्कृतियों का उल्लेख।
7. प्राकृतिक चित्रण: गीत में भारत की प्राकृतिक सुंदरता का चित्रण किया गया है, जैसे कि “गंगा की पावन धार” और “हिमगिर का सुन्दर हार”।
8. संस्कृति का वर्णन: गीत में भारत की सांस्कृतिक धरोहर का वर्णन किया गया है, जैसे कि “राम सीता शंकर का सार” और “कान्हा के जैसा यार”।
और अंत मे मैं यही कहना चाहूंगा कि यह गीत एक अद्भुत देशभक्ति गीत है जो श्रोताओं को देशभक्ति की भावना से भर देता है और उन्हें भारत की सुंदरता और संस्कृति के प्रति जुड़ने में मदद करता है।
अंत में मैं यही कहना चाहूँगा कि, यह गीत एक अद्भुत देशभक्ति गीत है जो श्रोताओं को देशभक्ति की भावना से भर देता है और उन्हें भारत की सुंदरता और संस्कृति के प्रति जुड़ने में मदद करता है। मैं उम्मीद करता हूँ आदरणीय जी के द्वारा हमें और भी सुंदर सुंदर गीत हमें पढ़ने को मिलते रहेंगे । मैं इनके उज्ज्वल दीर्घायु स्वस्थ्य जीवन की कामना करता हूँ ।।
समीक्षक
डॉ अमित कुमार बिजनौरी
कदराबाद खुर्द स्योहारा
जिला बिजनौर उत्तर प्रदेश