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14 Jul 2025 · 7 min read

पुस्तक समीक्षा भारतीय संविधान निर्माता

पुस्तक समीक्षा ।
पुस्तक का नाम :- भारतीय संविधान निर्माता
डॉ भीमराव आंबेडकर
(साझा काव्य संग्रह )
संपादक :- डॉ पी० बी० समदर्शी एटा

वैसे तो कई लेखकों की पुस्तक और कई साझा काव्य संग्रह है लेकिन मैं आज जिस काव्य संग्रह के बारे में आपको अवगत करा रहा हूँ । उस काव्य संग्रह का नाम “भारतीय संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर ”
(साक्षा काव्य संग्रह )
जिसका संपादन’ डॉ. पी. बी. समदर्शी एटा ‘ ने
समदर्शी प्रकाशन साहिबाबाद गाजियाबाद के कर कमलों से हुआ है ।जिसका भव्य विमोचन कार्यक्रम अलीगढ़ में हुआ था
पुस्तक का मुख पृष्ठ देखते ही बनता है । इस काव्य संग्रह में एक सौ बाईस कवि और कवियत्रियों के जीवन परिचय के साथ उनकी एक रचना को शामिल किया गया है ।

यूँ तो यह काव्य संग्रह डॉ भीमराव जी को पूर्ण रूप से समर्पित किया गया है ।
इस काव्य में एक से बढ़कर एक रचनाओं को शामिल किया गया । पुस्तक की जितनी भूरि भूरि तारीफ की जाए कम है ।
संपादक की कलम से लेकर अनुक्रम को बड़े सलीके से सजाया गया है
पेज न्० 11 पर सिद्धार्थ प्रकाश मधुरा निवासी ने बहुत सुंदर रचना लिखते हुए कुछ पंक्तियाँ आपके समझ

जब आस न् थी कोई बाकी ।
जब आँख बहुत रोई साथी ।
तब एक मसीहा आया था ।
उसने ये चमन खिलाया था

अगले बढ़ते हुए
बहुत ही प्रसिद्ध कवि आ० राजेश कुमार बौद्ध जो की गोरखपुर की शरजमी से है उनकी रचना पेज संख्या 15 पर है कुछ यूँ —

सन् उन्नसी सौ सत्ताइस में, मन भीमराव का हर्षाया ।।
जातीय समस्या हल करने, साइमन कमीशन जब आया।।

और जब आगे पढ़ते है आ० सत्य देव् सिंह आजाद की खूबसूरत सृजन आँखों के सामने तैरने लगता है । जो इस प्रकार से …
” जिंदगी में थोड़ी थोड़ी आस लगने लगी ” यह रचना दिल को भा गयी ।
ओर अगले पृष्ठ की ओर रूख करते है
कवि हरिश्चंद हरीश आजमगढ़ की प्यारी सी रचना
जिसका शीर्षक आंबेडकर महान है
ओर अगले पृष्ठ संख्या पर जिस पर मेरा एक गीत और जीवन परिचय को शामिल किया गया है जिसके बोल :-

लक्ष्य साध और गम को छिपाना सीखे कोई मेरे भीम से ।
आगे ही बढ़ना , सघर्ष करना सीखें कोई मेरे भीम से ।।
आप भी बता सकते है मैंने कैसा लिखा है
हां पेज न. 23 पर आ० डॉ योगेंद्र प्रसाद अनिल औरंगाबाद बिहार से जिन्होंने उड़ियान छंद में साहेब के भी साहब बाबा साहेब थे ।
बड़ी ही मनमोहक रचना है ।

आगे बात करे पेज न० 25 की तो साहित्यकार पी० यादव “ओज” झारसुगुडा ओडिशा जी जिनकी रचना

दीप कैसे मैं जलाऊँ,
चहुँ ओर जब फैला अंधेरा ।
एक ओज भरा बेहद ही खूबसूरत गीत है ।
अगले पृष्ठ की ओर चलते है तो उत्सव जैन नोगाम बांसवाड़ा जिला राजस्थान से बड़ी बेमिसाल उनकी रचना
संविधान निर्माता विद्धान पुरूष

और धीरे धीरे अगले पृष्ठ न० 27 पर विमल फ़रीदाबादी हरियाणा जी ने बहुत सुंदर गीत

आज का अंबेडकर फुले मिशन
जो अपनी बेवाक लेखनी के लिए जाने जाते है हरीश पंडाल (विचार क्रांति ) की रचना संविधान दिवस एक अमिट छाप छोड़ती हुई है ।
अब अगले पृष्ठ पर डॉ दीपा कोहली दीप जो कि शिवपुरी मध्यप्रदेश से कविताओं के साथ साथ चित्रकारी का बहु हुनर रखती है उनके शब्द है शोषितों का मसीहा बाबा साहेब बहुत ही उत्कृष्ट सृजन है ।
अगला पृष्ठ जैसे ही सामने आता है बहुत ही सुंदर नाम जे० एस० जय चौहान जी देपालपुर इंदौर मध्यप्रदेश जी की अद्वय रचना जिस के बोल है ।

उदित उदयमान सूर्य सा वह मसीहा महान था ।

अब पृष्ठ संख्या 37 मेरे सामने है और रामचन्द्र प्रसाद त्यागी जी द्वारा बहुत ही उत्तम अभिव्यक्ति
जय भीम
एक शब्द है
परिवर्तन का,
अमानवीय अत्याचार,

जैसे ही पृष्ठ को पलटते है जालिम प्रसाद गोरखपुर उत्तर प्रदेश की शरजमी से बड़ी ही मार्मिक रचना

आंबेडकर कौन शीर्षक से खूबसूरत अभिव्यक्ति है ।

बहुत ही जाना पहचाना नाम अलीगढ़ की शान आ० आर एस आघात का बेहद उम्दा गीत
हे शिल्पकार तू जिसने यूटब पर भी धाम मचा रखी है ।
जितनी तारीफ की जाए कम है ।
अब पृष्ठ 45 मेरे सामने है उषा श्रीवास्तव(उषा किरण) सीतामढ़ी, बिहार से उनकी रचना के बोल है

नमन है बाबा साहब को लाजबाब तरीके से शब्दो को पिरोया था वाह सुंदर ।
पेज न्० 47 पर सुनील कुमार सुमन जी भदेशी अलीगढ़ उत्तर प्रदेश से उनकी रचना बाबा तेरा इस क़दर दुःख उठाना
मार्मिक सृजन कमाल है ।

अन्य कवि जिन्होंने बहुत ही उत्कृष्ट सृजन भेज कर इस पुस्तक का हिस्सा बने है वह अर्कवंशी डॉ श्रीराम शास्त्री ,जिन्होंने आंबेडकर जी को नायक कहा ।
और डॉ अशोक शास्त्री जी ने भीम के शीषर्क से संदेश देती रचना का सृजन कर पुस्तक में चार चांद लग गए ।

ऐसे ही डॉ मोहनलाल जी ने एक महान मसीहा उद्धारक है ।
पृष्ठ 55 पर डॉ श्रीमती नीरा परमार जी ने बहुत ही बढ़िया संदेश नृशंसता का खेल अभिव्यक्ति के माध्यम से प्रकाश डाला है ।

कवि तुलसीराम राजस्थानी जी की रचना पढ़कर # डॉ. भीमराव आंबेडकर जी के बारे में सरल शब्दों से बेमिशाल सृजन किया है ।
और इनके बाद संगीता जी ने नदियाँ शीर्षक के माध्यम से मन के उद्धगर है ।

अब मैं पहुंच गया पृष्ठ संख्या 61 पर सुमित्रा साहू जी की लेखनी की जादूगरी कमाल का सृजन है
पल पल प्रफुल्लित मध्यप्रदेश महू जो तुझ सा श्रेष्ठ सुत पाया ….

इनके बाद राधा कटनी जिला भोपाल की रचना
बाबा की देन के अंतर सुंदर अभिव्यक्ति है ।
श्रीमती आरती रैदास ने वरदान संविधान के हवाले अपनी बात सुंदर ढंग से अपने शब्दों के जोड़ से रचना रखी है ।
डॉ ब्रह्मदेव कुमार जिला गोण्डा झारखंड राज्य जी ने अपने शब्दों का बहुत ही सुंदर ताना बाना बुना है उनका

शीर्षक आदर्श महानायक के रूप में बाबा भीम का उल्लेख करते हुए उनके जीवन पर प्रकाश डाला है ।
अगले पृष्ठ संख्या 71 पर रेनू बाला सिंह जो वैभव इंदिरापुरम गाजियाबाद उत्तर प्रदेश जो पठन पाठन मंच संचालन योग संगीत(गायन, वादन, नृत्य) जिन्हे महारत हासिल है उनकी

कविता का शीर्षक “बाबा साहेब के सपनों का भारत”

पन्ना पलटते ही डॉ अरविंद श्रीवास्तव “असीम” जी एक कुशल समीक्षक कहानीकार संपादक वक्ता अनुवादक है अपनी लेखनी के माध्यम से
” धन्य हुआ था देश हमारा ।
भीमराव को पाकर।
पेज संख्या 75 पर मदन सालवी औजस्वी चितौड़गढ़ राजस्थान से अपनी रचना के माध्यम से
” जो देखते हुए भी
देखता नहीं है ।
वहीं का वहीं है ।
बहरा है वो जो,
सुनकर भी सुनता नहीं है ।
आगे पृष्ठ पलटते है सुनीता वर्मा ‘सन्ध्या’ बांदी कुई जिला दौसा राजस्थान की लाजबाब कृति

” बात बात पर जो पूछती है बहने,
बाबा साहेब आंबेडकर ने क्या किया ?
उनको जरा बता दूँ अब मैं,
बाबा भीम ने क्या किया ।

बहुत ही सूचीबद्ध रंजु रही ने अपनी भावनाओं को

” बाबा साहेब आंबेडकर की चरणों मे श्रद्धांजलि ”

अगले पृष्ठ पर डॉ कृपाराम कृपालु जनपद जालौन ने अपनी बात को इस प्रकार रखा

” फिर से लड़ो लड़ाई यारों, बहुजन के सम्मन की ।
एक बार सब मिलकर बोलो, बाबा साहब महान की ।।

पेज संख्या 81 पर प्रा० जगदीश अमृत घनघाव जो कि शिरोल शाहपुर तहसील जिला ठाणे महाराष्ट्र से अपनी वाणी की जादूगरी में (अष्टाक्षर काव्य रचना )

बाबा साहब ना होते
तो जिंदगी ना होती ।।

डॉ आमलपुरे सूर्यकांत विश्वनाथ महाराष्ट्र जी अपने भावनाओ को कुछ यूँ लिखा
” आपके ज्ञान और संघर्ष से,
पूरी दुनिया पवित्र हो गई ।

पेज 85 पर चंद्रा बौद्ध शिक्षिका सौरमऊ सदर कोतवाली सदर सुल्तानपुर अपनी भावनाओं को लिखती है

” सर झुकाकर चलने को
स्त्री की मर्यादा बताया ।
रहनुमा अपने हमें..
सर उठाकर चलना सिख दिया ।।

अगले पृष्ठ संख्या 87 पर आर.डी. गौतम विनम्र साबौता गौतम बुद्ध नगर उत्तर प्रदेश से जो दिल्ली प्रशासन में प्रवक्ता लिखते है

भीम ने किया उपकार ,
बाबा ने मेरा किया उद्धार ।

आगे संतोष कुमार जांगड़े जो एक N G O संचालक है वह लिखते है संविधान की बदौलत सब कुछ मिला ।
और आगे रामस्वरूप दिनकर कहते है जागे तो जय भीम के माध्यम से सुंदर सृजन किया ।
उनसे अगले पृष्ठ पर संजय सवेरा जी कहते है

बहुत दिनों से लखत लखत इ आंखियाँ,
बस सुखि सुखि कै बिलकुल पथराय गयी ।

इसी के साथ सुनील कुमार कर्दम अपनी गजल के माध्यम से लिखते है

आँखों मे तूफान लिए फिरते हैं हम
दिल मे कुछ अरमान लिए फिरते है हम ।।

पेज न० 97 पर भीम कुमार जी लिखते है डॉ आंबेडकर जी का जीवन दर्शन शीर्षक से बहुत लाजबाब सृजन ।
अब मैं पहुँच गया 101 पृष्ठ पर जहाँ देवप्रशाद पात्रे अपनी अभिव्यक्ति लिखते है

अधिकार हमारे जीवन की दिया भारत को संविधान ।

आगे विमल जी कह रही है
“अनुसरण करो विचारों का ”

आगे जलेश्वरी गेंदले जी जिनका जीवन परिचय में कई ख्याति है वह लिखती है ।

गाँव से शहर में अनोखा नजारा है आज
देश भर में 14 अप्रैल की रौनक है खास

पेज को पलटते ही सुप्रसिद्ध कवि और शिक्षक प्रजापति सिंह शिव जो राष्ट्रपति द्वारा भी सम्मानित हो चुके है वर्तमान में रिटायर्ड हो चुके है उनका निवास महेशरा अमरोहा जो लिखते है।

दुनिया मे परचम लहरा कर चले गए तुम बाबा जी
निर्बल मन को बली बनाने गये संविधान लिख बाबा जी ।।

आगे दी० बी० जगतपुरिया एक विख्यात कवि समीक्षक ज्येष्ठ पत्रकार जिन्हें चार राष्ट्रीय पुरष्कार आदि सम्मानों से सम्मानित हो चुके है वह लिखते है।
” डंके की चोट पर ”
अपनी रचना को शीर्षक दिया और गजब का लेखन किया।
असम के बरपेटा से किशोर अग्रवाल कुशाग्र जी लिखते है
बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर इसी विषय को ध्यान करती रचना बहुत खूब लिखी ।

ओर अगले पृष्ठ पर डॉ शंकर लाल लिखते है
“ले रहे हसि सांस हम उस पृथु के उपकार से
डॉ राम कृष्ण शास्त्री लिखते है
भीमराव की अद्धत रचना भारत का संविधान है ।
ओर आगे लाखन सिंह हलचल लिखते हैं
सदियों से जो दबे हुए थे बाबा ने उद्धार किया ।
डॉ नामित कुमार सिंह लिखते है ।

सुनो बहुजन?
अब नही करना है …..

अंत मे इस पुस्तक की अंतिम रचना संपादक डॉ पी० बी० समदर्शी जनपद एटा लिखते है

जब भारत को बाबा भीम ने संविधान दिया ।
बहुजन शोषित पीड़ितों को सम्मान दिया ।।

और अंत में पुस्तक बहुत ही खूबसूरत बन पड़ी है प्रत्येक कवि और कवियत्री ने अपनी श्रेष्ठ रचना के माध्यम से पुस्तक का मान बढ़ाया है मैं तो यही कहना चाहूँगा ऐसे काव्य संग्रह आगे भी निकलते रहे ओर पाठकगण इसे पढ़कर अपनी राय और टिप्पणी अवश्य दे ।
पुनः सभी रचनाकारों को दिल से बधाई आप सभी स्वस्थ्य दीर्घायु रहे और साहित्यिक जीवन मे उन्नसी करते रहें ।
सप्रेम भेंट
डॉ अमित कुमार बिजनौरी
कदराबाद खुर्द स्योहारा
जिला बिजनौरी
उत्तर प्रदेश

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