पुस्तक बाल गीतमाला रचियता अरविन्द कुमार समीक्षा
पुस्तक का नाम :- बाल गीतमाला
पुस्तक रचियता :- अरविन्द कुमार उन्नाव
पुस्तक समीक्षक :- डॉ अमित कुमार बिजनौरी
बाल साहित्य एक अनूठा साहित्य है जिससे बच्चों के बौद्धिक विकास के लिए बेहद जरूरी है । क्योंकि पुरातन जमाने मे दादा दादी किस्से कहानियों और चुटकलों को सुनाकर खूब मनोरंजन करती थी क्योंकि वह युग मोबाईल युग नहीं था ।लेकिन आज के युग मे मोबाईल क्रांति आ गयी है। बच्चों के हाथों में खेल खिलौनों की जगह मोबाईल आ गया । फिर भी बाल गीत और बाल कविताओं का नन्हें मुन्ने बच्चों को ज्ञान का प्रचार प्रसार ओर उनको कविता या गीत के माध्यम से बहेतर तरीके से समझाया जा सकता है और उनके जीवन को नईं दिशा दी जा सकती है ।
आज के ऐसे समय में कवि महोदय अरविन्द कुमार ने भी बालगीत माला का सृजन कर बच्चों को बालगीत पुस्तक समर्पित करने का एक अमिट काम किया है ।
पुस्तक में कुल 30 पेज है । पुस्तक का मुख्य पृष्ठ देखते ही बनता है ।
इस संग्रहों में 21 गीत हैं जो बच्चों को नैतिकता, सामाजिक मूल्यों और पर्यावरण के प्रति जागरूक करने में मदद करते हैं।
इस बाल गीत माला की मुख्य विशेषताएं
○सरल और सुगम भाषा :- बाल गीतों की भाषा सरल और सुगम है, जो बच्चों को आसानी से समझ में आती है।
○नैतिकता और मूल्य:- इन गीतों में नैतिकता और मूल्यों को बढ़ावा दिया गया है, जो बच्चों के चरित्र निर्माण में मदद करता है।
○पर्यावरण और सामाजिक मुद्दे:- इन गीतों में पर्यावरण और सामाजिक मुद्दों पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है, जो बच्चों को इन मुद्दों के प्रति जागरूक करने में मदद करता है।
बाल गीत माला का महत्व
○बच्चों के लिए मनोरंजन और शिक्षा :-बाल गीत माला बच्चों के लिए मनोरंजन और शिक्षा का एक अच्छा साधन है।
○बच्चों के चरित्र निर्माण में मदद:-इन गीतों में नैतिकता और मूल्यों को बढ़ावा देने से बच्चों के चरित्र निर्माण में मदद मिलती है।
○बच्चों को सामाजिक मुद्दों से जोड़ना :- इन गीतों में सामाजिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने से बच्चों को इन मुद्दों से जोड़ने में मदद मिलती है।
पुस्तक का पहला गीत
अगर पेड़ जग में न होते
क्या जग सुंदर हो पाता ।
पशु पक्षी कहाँ रहते बच्चे!
क्या इंसान कुछ खा पाता ।।
सुंदर ढंग से रखा गया है । ऐसे अगले गीत में कुछ यूं उसके कुछ बोल
एक मेरी प्यारी सी गुड़िया
वो तो है जादू की पुड़िया ।
एक ओर गीत के बोल
बादल आया हुई बरसात
दिन में हो गई जैसे रात ….
बहुत ही सुंदर सुंदर गीत लिखे है एक ओर गीत आपके समझ
दादी हमारी भोली भाली
माँ से प्यारी और निराली ।।
आगे गीत पर गौर करें ।
बाग बगीचे खूब लगाओ
और धरा खूब सजाओ ।।
क्या कहने कवि महिदय के
सुबह सबेरे जल्दी उठकर
माता पिता को करो प्रणाम
और दूसरी रचना को देखिए
दोस्त है मेरा सबसे अच्छा ।
सबसे सुंदर सबसे अच्छा ।।
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आसमान में उड़ी पतंग
लेकर मेरे सपनों को संग
इस प्रकार, बाल गीत माला बच्चों के लिए बहुत ही उपयोगी और मनोरंजक साधन हो सकती है, जो उनकी नैतिकता, मूल्यों और सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा देने में मदद कर सकती है ।आप सभी सुधिपाठको से अनुरोध है कि आप खरीदकर अपने बच्चों को दे । इस आशा उम्मीद है की आपको यह पुस्तक पसंद जरूर आएगी ।
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समीक्षक
डॉ अमित कुमार बिजनौरी
कदराबाद खुर्द स्योहारा
बिजनौर उत्तर प्रदेश