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14 Jul 2025 · 1 min read

सावन का मेला कुंभ

सावन का मेला कुंभ

आया सावन का मेला है, त्यौहार बड़ा अलबेला है
हर हर बम बम गूंज रहा, जन- दर्शन को उमड़ रहा
बादल अभिषेक को आए हैं, घनघोर घटाएं लाए हैं
सावन जमकर बरस रहा, जलधार धरा को चढ़ा रहा
उमड़ रही सर सरिताएं, खेत बाग तरूवर और लताएं
फूट पड़े झरने गिरवर से, कल कल गीत खुशी के गाएं
धरती अंबर प्रेम मिलन है, प्रकृति का हर जीव मगन है
त्रय ताप का हुआ समन है,बिजली और मेघ नर्तन है
सजे हुए चहुं ओर शिवाले, तीर्थ सरोवर मंदिर सारे
जन समुद्र की लहरें जैसे, शिव सागर के आईं किनारे
पुष्प पत्र फलफूल लिए, धानी चूनर धरा है धारे
नयनाभिराम हर दृश्य धरा पर, मन मोह रहा नैना रतनारे
श्रावण सोमवार अनुपम है, ऊं नमः शिवाय मंत्र उचारे
हर हर गंगे हर हर महादेव, ओमकार गगन में गूंजा रे
सुरेश कुमार चतुर्वेदी

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