Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
14 Jul 2025 · 1 min read

*साम्ब षट्पदी---*

साम्ब षट्पदी—
14/07/2024

(1)- प्रथम-तृतीय तथा चतुर्थ-षष्ठम तुकांत

मैं सारथी।
कृत संकल्पित,
विजय पथ का पथी।।
द्रोह लहू में नहीं है मेरे।
नमक का कर्ज चुकाना है शेष,
मुझसा कहाँ पाओगे यहाँ बहुतेरे।।

(2)- प्रथम-द्वितीय, तृतीय-चतुर्थ, पंचम-षष्ठम तुकांत

आरती का।
इस भारती का।।
गाँव की कुमोदिनी का।
शहरी शीतल मोहिनी का।।
वनांचल में बुधवारा कहती।
उनके आने से सुरक्षित रहती।।

(3)- द्वितीय-चतुर्थ तथा षष्ठम, प्रथम तुकांत

है दामिनी।
अति ही चंचल।
नाचती है पुरवाई,
हवाएं गा रही हैं मंगल।।
धरती दुल्हन बन निहारती,
अतीव आतुरता से भरी ज्यों कामिनी।।

— डॉ. रामनाथ साहू “ननकी”
संस्थापक, छंदाचार्य
(बिलासा छंद महालय, छत्तीसगढ़)

[][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][]

Loading...