तन्हा क्यों है
जरूरी होकर भी तु इतना जरूरी क्यों है।
मेरे पास होते हुए भी तुम इतना तन्हा क्यों है।
मेरे हो तो गैरों के बीच में क्यों हों
लब में हंसी है तो आंखों में पानी क्यों है।
दिले बर्बाद की कहानी कहें किसे
हर फसाने में मंजूरी तेरी क्यों है।
क़दम मेरी ओर बढ़ाओ तों दामन थमा दूं
तेरे सीने में धड़कती मेरी धड़कन क्यों है।
मेरे होते हुए भी मेरे नहीं
मोहब्बत है तो फसाना क्यों है।✍️
निर्मला सिन्हा निशा💞