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13 Jul 2025 · 1 min read

दोहा पंचक. . . . . नवयुग

दोहा पंचक. . . . . नवयुग

कितना दूषित हो गया, वर्तमान माहौल ।
लाज, धर्म, ईमान का, उड़ता आज मखौल ।।

सिर से पल्लू उड़ गया, नहीं नयन में लाज ।
रोक -टोक भाती नहीं, नये दौर को आज ।।

कल से पीढ़ी आज की, माना थोड़ी तेज ।
दम्भ,क्रोध से पर सदा, रहती वो लबरेज ।।

पहली पीढ़ी मौन अब, देख आज का हाल ।
परामर्श पर आज की, पीढ़ी करे सवाल ।।

कुछ तो ऐसी बात है , नव पीढ़ी में यार ।
मन में जो यह ठानती, उसे करे साकार ।।

सुशील सरना / 13-7-25

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