मैं हूँ, तभी तो शिकायतें हैं…
मैं हूँ, तभी तो सवाल हैं,
हर लम्हा मेरे नाम की हलचल है।
अगर न होता, तो कौन सुनता,
तेरे मन की वो उलझन हलचल है?
शिकायतें हैं, तो जुड़ाव भी है,
तेरी बातों में मेरा भाव भी है।
तू गिला करता है मुझसे हर रोज़,
इसका मतलब, तुझमें अभी मेरा प्रभाव भी है।
मैं चुप रहूँ तो तू कहे, “बदला है”,
बोलूँ तो कहे, “अब पहले जैसा कहां रहा?”
तू भूले कि रिश्ता सिर्फ मुस्कानों का नहीं,
थोड़ी तकरारों में भी तो प्यार बहा।
मैं थकता नहीं इन शिकवों से,
क्योंकि जानता हूँ —
जब तक हूँ, तू बोलेगा,
जब जाऊँगा, तो शायद तुझे भी खलेगा।
इसलिए मत रोक शिकायतें अपनी,
तेरी हर शिकायत में मेरा होना बसता है।
मैं हूँ, यही तो सबसे बड़ी बात है,
क्योंकि “मैं हूँ, तभी तो शिकायतें हैं…”
-शिvam😊