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13 Jul 2025 · 1 min read

*जब पतझड़ लौटे*

जब तेरे जीवन में
लौट आएँगे पतझड़,
तो मैं अपने हिस्से का
वसंत तुम्हें दूँगा।

जब सूख जाएगा
बंजर सा तेरा मन,
मैं अपने हिस्से की
नदी की धार तुम्हें दूँगा।

जब भी लगे तुम्हें,
तेरी दुनिया
हो गई है फीकी,
तो बस आँखों से कह देना,
मैं अपनी सतरंगी दुनिया
तुम्हें सौंप दूँगा।

अगर तुम्हें स्वीकार हो,
तो मैं अपनी हर मुस्कान,
अपने हिस्से की
फूल, नदियाँ, बारिश,
आशा की नई किरणें,
हर चाहत—
तुम्हारे नाम कर दूँगा।

✍️ दुष्यंत कुमार पटेल

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