अगाह
अगाह
हिम -गिरि बोल रहा है
सिंघु हमें ललकार रही
कुर्वाणी दे पायी आजादी
संगीन पथ जीवन खड़ा
बाढ़ शैलाब आशियाना मिटा रहा
पर्यावरण विलुप्त हो रहा है
स्वच्छ जल अनल के लाले पड़े
व्यवस्था प्रशासन थक चूर हुआ
ऐसी नौबत क्यों आन पड़ी
भावी पीढ़ी को क्या देकर
हम जायेंगे हे इंसान
विचार सोच करें जरा
समस्या गंभीर है धरती पें ।