मन्दिर जाकर जब करूँ प्रार्थना,
मन्दिर जाकर जब करूँ प्रार्थना,
समझकर भगवान को अपना मैं
पर निंदा करते समय भूल क्यों,
जाता हूँ भगवान को मैं।
प्रेमभाव जब उठे है मन में,
सारी सृष्टि भगवान की मानूं मैं।
पर नफरत करते समय भगवान को,
क्योंकर भूल जाता हूँ मैं।।
जब करूँ दान करूँ मैं तब तब सोचूँ,
मेरा भगवान सभी में बसता है।
पर चोरी करते समय भूल जाता,
भगवान सभीकुछ देखता है।।
यदि भक्त बनके मैं जी पाता तो,
कुछ भी गलत मैं कर पाता।
पर मैं तो बुद्धिमान बन गया और,
पुण्य से ज्यादा पाप कर गया।
विजय कुमार अग्रवाल
विजय बिजनौरी।