सावन पावन है अभी, शिव की कृपा अगाध।
सावन पावन है अभी, शिव की कृपा अगाध।
भटक रहा मानव जरा, अपने मन को साध।।
कर्म निरंतर जो करे, करता है उत्थान।
जिसकी जैसी भावना, वैसी है पहचान।।
:- राम किशोर पाठक
सावन पावन है अभी, शिव की कृपा अगाध।
भटक रहा मानव जरा, अपने मन को साध।।
कर्म निरंतर जो करे, करता है उत्थान।
जिसकी जैसी भावना, वैसी है पहचान।।
:- राम किशोर पाठक