वेस्टर्न यूपी,हरियाणा,दिल्ली से लगा हुआ जो एरिया है यहाँ के
वेस्टर्न यूपी,हरियाणा,दिल्ली से लगा हुआ जो एरिया है यहाँ के लोगों के कांवड़ यात्रा में जबरदस्ती का भौकाल होता है.श्रद्धा कम, बॉडी बिल्डिंग ज्यादा होता है.स्पोर्ट्स शूज पहनकर कांवड़ ले जाएंग अरे भाई ओलंपिक में जा रहे हो क्या.
पचास लीटर का कांवड़,सौ लीटर का कांवड़,नीला ड्रम कांवड़,फलाना कांवड़, ढीमकाना कांवड़ जितना ज्यादा जल महादेव उतना ज्यादा खुश होंगे? कांवड़ हम भी ले गए हैं. काशी विश्वनाथ धाम,सेमराधनाथ धाम और वैद्यनाथ धाम जाने का अवसर हमे भी प्राप्त हुआ है.लेकिन इन कांवड़ यात्राओं में सिर्फ श्रद्धा था.
और नियम इतना था कि पालन करने में गांव फट जाए. तन पर भगवा वस्त्र.और नंगे पांव 125 किलोमीटर की लंबी यात्रा.छोटी-छोटी पीतल की लोटकियों में जल भरते थे. बांस की लचकदार कांवड़.जिसके दोनों सिरों पर प्लास्टिक के सांप लगे रहते. छोटी छोटी घुंघरू. बस हो गया कांवड़ तैयार…
तला भुना वर्जित था… एकदम सात्विक भोजन… वो भी एक टाइम… जुगाड़ हो गया तो खुद से लिट्टी चोखा बनाकर खा लिया… ये बड़े बड़े डीजे, थार, बॉडी बिल्डिंग, डौले सौले वाला कांसेप्ट नहीं था… न कभी जरूरत महसूस हुई और न ही हमारे महादेव ने हमसे कहा..!🙏