गुरु महिमा
जीवन का सत पंथ, हमें गुरुवर समझाते।
देकर उत्तम ज्ञान,शिष्य को सफल बनाते।।
उन्नति कर के शिष्य,शिखर पर जब है जाता।
सर्वप्रथम यह देख,अधिक गुरु ही हर्षाता।।
गुरुवर का आशीष,शिष्य को हरदम मिलता।
पाकर गुरु से ज्ञान,शिष्य का जीवन खिलता।।
देकर सत सम्मान, वन्दना गुरु की करिए।
नहीं द्वेष का भाव,कभी गुरु प्रति हिय भरिए।।
पाकर गुरु वरदान,बदलती जीवन काया।
सुफलित होते काज,दौड़ती आती माया।।
कहते हैं विद्वान, करें जो गुरु की सेवा।
कृपा करें श्री नाथ,मिले धन यश की मेवा।।
डॉ ओम प्रकाश श्रीवास्तव ओम
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