मां के खेत में धान बोआया है,
मां के खेत में धान बोआया है,
धान कटवा कर पिता आंगन में रख गए हैं।
मां ने पीट कर, सूखा कर उसे बोरी में भर लिया है।
अहा! धान कूटते वक्त कितना सुगंधित चावल!
मां आज पुलाव बनाएगी।
उत्साह से कुकर में चावल, दालचीनी , इलाइची डाली गई।
घी के तड़के में भुना गया चावल।
अब तो पुलाव कुकर में चढ़ गया।
ढक्कन बंद हो गई।
अगर पुलाव जल जाए , गल जाए तो मां क्या करे?
मां कुकर को माज धो के उसमें दाल बना लेगी।
पुलाव नहीं जला गला, बेटी जली गली है।
इलायची और दालचीनी जाया नहीं हुआ,
दहेज और इज्ज़त जाया हुए हैं।
मां अफसोस कर रही है, उसे कुकर में पुलाव नहीं
तसला में भात बनाना चाहिए था।
जल भी जाता तो , मिट्टी पोत देती।
जला हुआ कुकर देख मां का मन खराब होता है।
वो उसे घर के बाहर के स्टोर में रख देती हैं।
#निवेदिता रश्मि