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12 Jul 2025 · 3 min read

बरसात की बारात

***बरसात की वो रात**
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बरसात की वो रात कुछ अलग थी। काले बादल आसमान को कुछ ढके हुए थे। कुत्तों की भौंकने की आवाज आ रही थी।
गांव की गलियों में बारिश की बूंदे टप_ टप करके गिर रही थी। बिजली कभी-कभी चमकती और उसके साथ ही दूर कहीं बादलों की गड़गड़ाहट सुनाई देती। चारों ओर एक अजीब सी खामोशी थी। बस बारिश की आवाज ही थी। जो उस सन्नाटे को तोड़ रही थी।
उस रात रमा अकेली थी।उसकी उम्र लगभग 14 15 वर्ष थी। वह अपने पुराने कच्चे घर में रहती थी। माता-पिता शहर गए थे ।शहर में उनका पूरा परिवार रहता था रात बहुत हो चुकी थी। रमा का भाई भी शहर से वापस नहीं आया। बरसात धीरे-धीरे बढ़ने लगी बिजली की आवाज तेज होने लगी रमा के मन में कुछ डर भी लग रहा था। मकान के चारों ओर पानी भर गया था। आसपास के सब लोग अपने-अपने घरों में थे । रमा की आवाज किसी को भी सुनाई नहीं दे रही थी तभी अचानक हवा और पानी की वजह से जानवरों की छप्पर टूट गई। रमा ने दरवाजा खोला और देखा तो घबरा गई। मुंह से अचानक आवाज आई _हे भगवान ,यह क्या हो गया? मेरे सारे जानवर गाय ,बैल बछड़े भी भीग रहे हैं। कुछ देर के लिए रमा शांत बैठ गई। बरसात रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी। घर में भी अंधेरा हो रहा था।
कैंडल भी हवा में बार-बार बूछ रहा था। रमा अपने जानवरों की हालत देखकर बहुत दुखी हो रही थी। करें तो क्या करें। रमा ने बरसात की परवाह किए बिना जानवरों को गौशाला से निकाला और थोड़ी दूरी पर जाकर पड़ोस की गौशाला में बांधने का निर्णय लिया। रात बहुत हो चुकी थी। गलियों में घुटने घुटने पानी भर रहा था। लेकिन रमा
ने अपनी हिम्मत से सभी जानवरों को सुरक्षित पहुंचाने का निर्णय लेकर वह अंधेरे को चीरते हुए निकल पड़ी। वहां जाकर रमा ने बहुत आवाज लगाई लेकिन कोई भी इस बरसात में बाहर निकलने को तैयार नहीं था। लेकिन उस मासूम ने अपने सभी जानवरों को अपने दूर के मामा के घर गौशाला में बांधकर आ गई। रमां को रात भर नींद नहीं आई। कानों में सिर्फ मेंढक की टर टर की आवाज ही सुनाई दे रही थी। कुछ देर

बाद कैंडल बुझ गया और
मकान में अंधेरा छा गया। कुछ नजर नहीं आ रहा था। तभी अचानक कहीं से एक काला सर्फ घर में दीवार के सहारे आकर बैठ गया। शायद वह भी अपने आप को बरसात से बचने के लिए रमा के घर आ गया। रमा ने देखा कि यह इतनी मोटी काली रस्सी हवा में क्यों हिल रही है।। बार-बार विचार आते और नींद टूट जाती। जैसे-जैसे सुबह होने लगी बरसात भी कम होने लगे और रमा को तेज नींद आने लगी। जैसे ही सुबह 6:00 बजे नींद खुली तो रमा की नजर सामने लटक रहे सर्फ पर पड़ी ।वह देखकर घबरा गई। जिससे मैं रस्सी समझ रही थी ।यह सच में सर्प है। रमा बिल्कुल चुप खड़ी रही ।और प्रणाम किया। सर्प तुरंत ही वहां से चलदिया। यदि रमा ने सोचा आवाज लगाऊंगी तो लोग इस बेचारे को मार डालेंगे। इसने तो मेरी रक्षा की है। रात भर यहां रहने के बाद भी इसने मुझे हानि नहीं पहुंचाई। फिर भला में क्यों इसका नुकसान करु।
बरसात खत्म हो चुकी ।रमा ने अपने सभी जानवरों को वापस अपनी गौशाला में लाकर बांध दिए । आस पड़ोस में जब पता चला तो लोगों को विश्वास नहीं हो रहा था कि रमा ने इतना बड़ा काम किया। इस प्रकार रमा ने उस बरसात की रात में अपनी परवाह किए बिना अपने जानवरों की रक्षा की।
कभी-कभी जिंदगी में हमें ऐसे मोड पर लाकर खड़ा कर देती है जहां हमें स्थिति बस बहुत से निर्णय लेने पड़ते हैं। प्यार, दया, और अपनापन यही वह चीज है जो इस दुनिया को जीने लायक बनाती है।
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“मुसीबत चाहे जितनी भी बड़ी हो, हिम्मत उससे बड़ी होनी चाहिए।”
यह कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि कभी-कभी स्थिति बस हम जो निर्णय लेते हैं। सही होते हैं।

डॉ मनोरमा चौहान
(मध्य प्रदेश हरदा)

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