"मोबाइल की तपस्या"
सबसे बड़ी समस्या, मोबाइल की समस्या।
हम सब कर रहे हैं, मोबाइल की तपस्या।।
मां बाप की बातों को इग्नोर कर रहे हैं,
ज्यादा समय मोबाइल पर रील चल रहे हैं।
खाना न पढ़ाई हाथों में है मोबाइल,
इस जेनरेशन का हुआ सब कुछ मोबाइल।
समझाने वाले से वह झगड़ा कर रहे हैं,
समाज में सबसे बड़ी, मोबाइल है समस्या।।
पति-पत्नी में हुआ है आज झगड़ा,
दोनों को झटका लगा है तगड़ा।
पत्नी ने पति की,पति ने पत्नी का यार जो है पकड़ा,
दोनों का ही नाजायज रिश्ता पनप रहा है।
कब हो जाए मर्डर किसका, यही तो चल रहा है,
शुरू होती है सबकी, मोबाइल से दिनचर्या।।
भय बना हुआ है हर किसी के मन में,
हर कार्य हो रहा है उसी की लोकेशन में।
समाज हमारा किस तरफ जा रहा है,
मोबाइल आज हर रिश्ते को खा रहा है।
गृहस्थी के काम पेंडिंग में मोबाइल पर अपडेट है सब,
खाली पड़े हैं मनी पॉकेट, मोबाइल है समस्या।।
समय और दूरी दोनों सिमट रहे हैं,
मोबाइल रूपी वायरस सबसे चिपट रहे हैं।
न जाने अनगिनत ये जीवन निगल रहे हैं,
चाही अनचाही वीडियो दिखा रहे हैं।
भिखारी भी अब फोन पर पे करा रहे हैं,
फोन विन सभी अकेले, यही तो है समस्या।।
संबंध,रिश्ते,दिमाग सिमट गए हैं,
समय और दूरी जब से सिमट गई है।
संबंध व रिश्ते मोबाइल से निभा रहे हैं,
विश्वास, रिश्ते, स्नेह,ख्याल कहीं खो रहे हैं।
मोबाइल को नवजात भी खिलौना बना रहे हैं,
रोज होती है अनहोनी, मोबाइल की समस्या।।
विद्युत की तरह मोबाइल भी अभिशाप वरदान,
प्रयोग करो किस पक्ष को यह तुम्हारा काम।
मोबाइल के जरिए कुछ कर रहे हैं नाम,
खुश करते समाज को उनके सुबह शाम।
मोबाइल पर दिमाग से लिया जिन्होंने काम,
अधिक समय की है, मोबाइल की तपस्या।।
स्वरचित रचना – डॉ ०ओमवती ”यादकेत”
सैदनगली अमरोहा (उ०प्र०)