आओ हम स्कूल चलें
ऊँची उड़ान अब भरना है,
साकार स्वप्न सब करना है।
बीती छुट्टी फिर गले मिलें,
आओ हम स्कूल चलें।।
नव परिधान पुस्तकें नई हैं,
नव विहान ऊर्जा नई है।
बस्ता कापी सब नए मिले,
आओ हम स्कूल चलें।।
धरती से अम्बर अपना है,
राहें कैसी भी हों चलना है।
कोमल मन में स्वप्न पले,
आओ हम स्कूल चलें।।
सबको पढ़ना लिखना है,
किरदार नये फिर गढ़ना है।
ऊँच – नीच न हमें छले,
आओ हम स्कूल चलें।।
शिक्षा पर अधिकार सभी का,
मेहनत से उद्धार सभी का।
सफलता के हैं द्वार खुले,
आओ हम स्कूल चलें।।
मंदिर जैसा स्कूल हमारा,
शिक्षालय हम सबका प्यारा।
पुष्प ज्ञान के यहाँ खिलें,
आओ हम स्कूल चलें।।
#स्वरचित एवं मौलिक रचना
#डा. राम नरेश त्रिपाठी ‘मयूर’
कानपुर – 208002, उ.प्र.