पानी व्यर्थ न कीजिये, पानी है उपहार।
पानी व्यर्थ न कीजिये, पानी है उपहार।
बिन पानी जीवन नही, जाने सब संसार।
जाने सब संसार, मनुज फिर भी ना माने।
ख़तम हो रहा नीर, लगा है तब पछताने।
अब तो करो सुधार, छोड़ भी दो नादानी।
नैना रहे निहार, भरो आँखों में पानी।
#डा. राम नरेश त्रिपाठी ‘मयूर’