हिंदी का अब हो रहा, सारे जग में मान।
हिंदी का अब हो रहा, सारे जग में मान।
भाल हिमालय सा दिखे, उन्नत इसकी शान।
उन्नत इसकी शान, कभी न किसी से डरती।
समझे दिल की बात, सभी को प्यारी लगती।
भारत माँ के भाल, दमकती जैसे बिंदी।
कह ‘मयूर’ कविराय, मधुर वाणी है हिंदी।
#डा. राम नरेश त्रिपाठी ‘मयूर’