अपने
मेरे पास मत बैठो
थोड़ी दूर रहो
तुम अपने हो
याद रखो
अपने जब पास बैठकर
छल जाते हैं तो
जैसे मौत आ जाती है
तुम दूर ही रहो
मेरे पास
मेरे दुश्मनों को बैठने दो
मैंने यह स्थान उनके लिए ही
सुरक्षित रखा है।
उनसे कोई भय नहीं
मैं सतर्क हूँ
वो पास हैं।
–अनिल मिश्र