मन मेरे तू सावन- सा बन।
मन मेरे तू सावन- सा बन।
मृदुल मधुर भावों से अपने,
कर दे जग को पावन-पावन।
मन मेरे तू सावन-सा बन।
तपें ताप से कितने प्राणी !
उन्हें सुना राहत की वाणी।
भरे सुखों से दामन-दामन।
मन मेरे तू सावन-सा बन।
© सीमा
मन मेरे तू सावन- सा बन।
मृदुल मधुर भावों से अपने,
कर दे जग को पावन-पावन।
मन मेरे तू सावन-सा बन।
तपें ताप से कितने प्राणी !
उन्हें सुना राहत की वाणी।
भरे सुखों से दामन-दामन।
मन मेरे तू सावन-सा बन।
© सीमा