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11 Jul 2025 · 1 min read

मन मेरे तू सावन- सा बन।

मन मेरे तू सावन- सा बन।
मृदुल मधुर भावों से अपने,
कर दे जग को पावन-पावन।
मन मेरे तू सावन-सा बन।

तपें ताप से कितने प्राणी !
उन्हें सुना राहत की वाणी।
भरे सुखों से दामन-दामन।
मन मेरे तू सावन-सा बन।

© सीमा

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