नमामि शंभु
नमामि शंभु
कृपालु शंकर आदि सुरेशा।
नमामि शंभु महिषं महेशा।।
त्रिलोचनाय कालं करालं।
रूपं अनूपं तव चंद्र भालं।।
जटा- जूटधारी हरणं क्लेशा।
नमामि शंभु महिषं महेशा।।
ओमकार रूपं निराकार रूपं।
लाभं सदा दर्शनं दिव्य रूपं।।
गौरी पति तव सुतं गणेशा।
नमामि शंभु महिषं महेशा।।
जगत गुरु त्वमेव शंकर।
तव तांडवं हरे प्रलयंकर।।
कृपां देहि नाथं गिरीशा।
नमामि शंभु महिषं महेशा।।
रचयिता:- राम किशोर पाठक