तिरे पथ का पत्थर उठाने लगे हैं
तिरे पथ का पत्थर उठाने लगे हैं
वो पत्थर मिरे घर में आने लगे हैं
ये सावन का मौसम बड़ा ही सुहाना
फसल धान के लहलहाने लगे हैं ।
कुछ पल मेरी आंखों में उतर लेते
मन की पीड़ा महसूस कर लेते
अपनापन सा लगने लगता हमें
मेरे कंधे का सहारा अगर लेते
नूर फातिमा खातून नूरी