वक्त की शाख में उड़ता परिंदा आज कुछ रुक सा गया है, कुछ थम सा
वक्त की शाख में उड़ता परिंदा आज कुछ रुक सा गया है, कुछ थम सा गया है ! बादलों ने कहा अब थोड़ा ठहर जाओ !
स्वरचित,
स्त्री शक्ति लेखनी 🙏 🙏
वक्त की शाख में उड़ता परिंदा आज कुछ रुक सा गया है, कुछ थम सा गया है ! बादलों ने कहा अब थोड़ा ठहर जाओ !
स्वरचित,
स्त्री शक्ति लेखनी 🙏 🙏