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10 Jul 2025 · 1 min read

दोहा पंचक. . . . गुरु

दोहा पंचक. . . . गुरु

हित में हो जो जीव के, गुरु कहता वह बात ।
उसकी नजरों में सभी, होते मानव जात ।

गुरु चरणों का जो करे, श्रद्धा से सम्मान ।
उसके जीवन से मिटें , अनचाहे व्यवधान ।।

अपने शिष्यों का सदा, गुरु रखता है ध्यान ।
इसीलिए संसार में, गुरु का नाम महान ।।

शीश नवाना उस जगह , गुरुजन के हों पाँव ।
गुरुओं के आशीष की, दुर्लभ मिलती छाँव ।।

गुरू दिखाता शिष्य को , सदा सत्य की राह ।
बिन गुरु मिलती ही नहीं, इस जीवन को थाह ।।

सुशील सरना / 10-7-25

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