दोहा पंचक. . . . गुरु
दोहा पंचक. . . . गुरु
हित में हो जो जीव के, गुरु कहता वह बात ।
उसकी नजरों में सभी, होते मानव जात ।
गुरु चरणों का जो करे, श्रद्धा से सम्मान ।
उसके जीवन से मिटें , अनचाहे व्यवधान ।।
अपने शिष्यों का सदा, गुरु रखता है ध्यान ।
इसीलिए संसार में, गुरु का नाम महान ।।
शीश नवाना उस जगह , गुरुजन के हों पाँव ।
गुरुओं के आशीष की, दुर्लभ मिलती छाँव ।।
गुरू दिखाता शिष्य को , सदा सत्य की राह ।
बिन गुरु मिलती ही नहीं, इस जीवन को थाह ।।
सुशील सरना / 10-7-25