इश्क की इबारत
खुदा की इबादत तो हमनें भी बहुत की थी
मोहब्बत की हर इक आयात हमनें भी पढ़ी थी
ताउम्र का साथ मुकम्मल भले ना हुआ हो
मगर इश्क की हर इक इबारत हमनें भी पढ़ी थी
शिव प्रताप लोधी
खुदा की इबादत तो हमनें भी बहुत की थी
मोहब्बत की हर इक आयात हमनें भी पढ़ी थी
ताउम्र का साथ मुकम्मल भले ना हुआ हो
मगर इश्क की हर इक इबारत हमनें भी पढ़ी थी
शिव प्रताप लोधी