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10 Jul 2025 · 1 min read

कविता की गली में,कलम से खिला मैं

कविता की गली में,कलम से खिला मैं
मैं अम्बर का गिरता पानी, मैं सागर सा उभरने वाला
न बस एक भाव का बुलबुला मैं
कविता की गली में , बस शब्दों सा चलता चला मैं

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