कविता की गली में,कलम से खिला मैं
कविता की गली में,कलम से खिला मैं
मैं अम्बर का गिरता पानी, मैं सागर सा उभरने वाला
न बस एक भाव का बुलबुला मैं
कविता की गली में , बस शब्दों सा चलता चला मैं
कविता की गली में,कलम से खिला मैं
मैं अम्बर का गिरता पानी, मैं सागर सा उभरने वाला
न बस एक भाव का बुलबुला मैं
कविता की गली में , बस शब्दों सा चलता चला मैं