तुम बहार बनके मेरे जीवन में आई तो थी ,
तुम बहार बनके मेरे जीवन में आई तो थी ,
मुझे कुछ दिन वो खुशियों के सपने दिखाई तो थी ।
सोचा था तेरे आंचल में सर रखकर सोऊंगा
हमें क्या पता कि सिर्फ वो एक परछाई तो थी ।
(जो अंधेरे में साथ छोड़ देगी)
प्रजापति कमलेश बाबू🙏
हाटा कुशीनगर, यूपी