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10 Jul 2025 · 1 min read

तुम बहार बनके मेरे जीवन में आई तो थी ,

तुम बहार बनके मेरे जीवन में आई तो थी ,
मुझे कुछ दिन वो खुशियों के सपने दिखाई तो थी ।
सोचा था तेरे आंचल में सर रखकर सोऊंगा
हमें क्या पता कि सिर्फ वो एक परछाई तो थी ।
(जो अंधेरे में साथ छोड़ देगी)

प्रजापति कमलेश बाबू🙏
हाटा कुशीनगर, यूपी

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