बाल कविता-
बाल कविता-
आओ धरती का श्रृंगार करें
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आओ धरती का श्रृंगार करें
चलो मिलकर सभी यह काम करें ।
यह बात है बहुत पुरानी सुनो
सुन करके तुम अपने हृदय गुनो ।
मुझसे कहती थीं मेरी नानी
धरा ओढ़े सुन्दर चूनर धानी ।
हरियाली ही इसका है श्रृंगार
पेड़-पौधे इसको दो उपहार ।
हर पौधे में होता है जीवन
खाद पानी उसकी संजीवन ।
पेड़-पौधे हैं तभी हम सब हैं
बात इतनी तो जानते सब हैं ।
चलो समय से सभी सँभल जाओ
सलाह है मेरी पेड़ लगाओ ।
मौलिक सृजन
पूनम दीक्षित
कृष्णा विहार कॉलोनी
ज्वाला नगर रामपुर
उत्तर प्रदेश