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9 Jul 2025 · 1 min read

सावन की पहली बूँद बनी अभिलाषा नयनों की

सावन की पहली बूँद बनी अभिलाषा नयनों की
दूसरी बूँद सजीव हुई प्रिय के स्पर्श-सपनों की
तीसरी बूँद बरसी बनकर विरही नयनों की शबनम
चौथी बूँद उतर आई मेरी आत्मा की मौन सरगम

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