सावन की पहली बूँद बनी अभिलाषा नयनों की
सावन की पहली बूँद बनी अभिलाषा नयनों की
दूसरी बूँद सजीव हुई प्रिय के स्पर्श-सपनों की
तीसरी बूँद बरसी बनकर विरही नयनों की शबनम
चौथी बूँद उतर आई मेरी आत्मा की मौन सरगम
सावन की पहली बूँद बनी अभिलाषा नयनों की
दूसरी बूँद सजीव हुई प्रिय के स्पर्श-सपनों की
तीसरी बूँद बरसी बनकर विरही नयनों की शबनम
चौथी बूँद उतर आई मेरी आत्मा की मौन सरगम