Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
9 Jul 2025 · 2 min read

सांस्कृतिक जीवन यात्रा

सांस्कृतिक जीवन यात्रा।
-आचार्य रामानंद मंडल
अप्पन जीवन यात्रा के सांस्कृतिक पड़ाव के कुछ चर्चा करैय छी।बाल आ किशोरा अवस्था मे रामानंदी सम्प्रदाय के प्रभाव पड़ल।वोहु मे लसकरी शाखा। बाबू जी जनकपुर के बिहार मठ के महंथ श्री रामभूषण शरण के शिष्य रहलन। गांव के स्थान में वो अबैत रहलन।हुनकर भाई संत श्री श्याम किशोर शरण रहलन।वो आबैत रहलन। असल मे वो हम्मर गांव के बगल के बासी रहलन। जौं अबथिन त भेंट करे जाइ।वो हमरो तीन ठर्रा चनन क देथिन।गांव मे एकाह नवाह होइत रहे। हमरा बघारा में रोज सांझ के कीर्तन होय।घर मे हर महीना पूर्णिमा के महादेव पूजाय। कहियो सत्यनारायण भगवान के पूजा होय।दू बेर लखराम पूजा आ एकाहो बाबू जी करैले रहलन। बाबू जी लगभग सभ दिन रामायण पाठ करैत रहलन।भावावेश मे कोनो प्रसंग पर रोइतो रहलन। हमहु बाल्मीकि रामायण, रामचरित मानस, दोहावली कवितावली, हनुमान चालीसा, महाभारत,श्री मद्भागवत गीता, कल्याण,वेद, मनुस्मृति आदि ग्रंथ पढली आ समझली।
जौं इण्टर मे गोयनका कालेज सीतामढ़ी मे ऐडमिशन लेली।त वरिय साथी गोकुल जी शहर स्थित बशुश्री टाकिज के नजदीक ओशो शिविर लेगन।हुनकर बड भाई ओशो के शिष्य रहलन।पांच दिवसीय शिविर मे भाग ले ली। ओशो के वरिष्ठ शिष्य प्रवचन करैत रहलन।आ टेपरिकॉर्डर से ओशो के प्रवचन सुनायल जाय। ओशो साहित्य के स्टाल पर गेली त ओशो शिष्य विक्रेता संभोग से समाधि की ओर पोथी पढे के सुझाव देलन।हम पोथी खरीद ले ली आ पढली। ओशो शिविर के प्रभाव पड़ल।बाद मे बहुत ओशो साहित्य के पोथी पढली।एगो नयी अनुभूति भेल।
जौं इण्टर कालेज मधवापुर मधुबनी में प्रयोग
प्रर्दशक पद पर योगदान देली तब राजनीति शास्त्र के व्याख्याता श्री रामविलास ठाकुर जी के सम्पर्क में अयली।वो गायत्री परिवार मे परिव्राजक रहलन। पुपरी में गायत्री महायज्ञ आयोजित करवैलन त हमरो ले गेलन। महायज्ञ में भाग लेली। गायत्री परिवार के पत्रिका अखंड ज्योति आ युग निर्माण योजना के पाठक बनली।बाद मे मधवापुर मधुबनी मेयो महायज्ञ भेल आ हमहू दीक्षा ले ली।
बाद मे कबीर पंथी लोग सभ से संपर्क भेल। सत्संग मे भाग ले ली। सामाजिक परिवर्तन के गहराई से समझ ली। लेकिन कबीर पंथी न बनली।
आर्य समाज के सत्यार्थ प्रकाश पढली।आर्य समाज द्वारा सामाजिक परिवर्तन के बारे मे जनली आ समझली।
बामसेफ से जुड़ली त बौद्ध आ अम्बेडकर साहित्य के अध्ययन कैली।आ बहुजन साहित्य के पढे के अवसर प्राप्त भेल।
पुनौरा मिडिल स्कूल में योगदान देली त शिक्षक मो नजिबुल्ला के माध्यम से इस्लाम धर्म के समझली। इस्लाम धर्म के कुछ पोथी पढ़ ली आ समझली।
कथा वाचक के रूप मे बाल व्यास जी, मोरारी बापू आ श्री रामभद्राचार्य जी से मानस कथा सुनले हय।
सुश्री शक्तिश्वरी बहन से श्री मद्भागवतो सुनले हय।
अभी तक जनकपुर धाम,पुनौरा धाम,बगही धाम,हलेश्वर धाम,फुलहर,देवकुली, उच्चैठ दूर्गा स्थान श्यामा मंदिर, दरभंगा,थाबे,बैजनाथ धाम, अयोध्या धाम, वैष्णो देवी मंदिर, कन्याकुमारी, जगन्नाथ धाम, हरिद्वार , ऋषिकेश,अक्षरधाम,दिल्ली,सांई मंदिर, मुम्बई,अमृतसर,काशी,प्रयागराज,बालातिरुपति, बोधगया, पावापुरी, राजगीर, कुशीनगर, सीतामढ़ी (यूपी),स्वर्ण मंदिर, काली मंदिर, कलकत्ता, मिनाक्षी मंदिर, लिंगराज, उड़ीसा,चर्च गोवा,मंगेश मंदिर , नैनीताल आदि धर्मस्थल के दर्शन क चूकल छी।
वर्तमान में मिथिला -मैथिली आंदोलन से जुड़ल छी आ मिथिला संस्कृति के विशेष रूप से पढ़ आ समझ रहल छी।
-आचार्य रामानंद मंडल सामाजिक चिंतक सह साहित्यकार सीतामढ़ी।

Loading...