चाहता मन पी तमस सब,
चाहता मन पी तमस सब,
बाँट दूँ घर-घर उजाले।
नीर इतना है दृगों में,
प्यास जग अपनी बुझा ले।
© सीमा अग्रवाल
चाहता मन पी तमस सब,
बाँट दूँ घर-घर उजाले।
नीर इतना है दृगों में,
प्यास जग अपनी बुझा ले।
© सीमा अग्रवाल