आषाढ़ का महिना
आषाढ़ का महिना
बीतता हुआ आषाढ़ का महिना हमें शीतलता पहुँचा रहा,,
सूखे हुए प्रकृति को फिर से हँसना सीखा रहा।।
तप्त ग्रीष्म ऋतु ने जिस प्रकृति को जलाया था,,
चहुओर जीव जंतुओ को गर्मी से झुलसाया था।।
चैत्र बैसाख के महिने ने ठंडी हवा के लिए तरसाया था,,
बूंद-बूंद पानी की किमत तब हमें भी समझ आया था।।
आज पुनः प्रकृति में हरियाली का सौंदर्य छा रहा,,
बीतता हुआ आषाढ़ का महिना हमें शीतलता पहुँचा रहा।।
सूखे हुए प्रकृति को फिर से हँसना सीखा रहा,,
बीतता हुआ आषाढ़ का महिना हमें शीतलता पहुँचा रहा।।
चारो दिशाओं में प्रकृति नये-नये श्रृंगार से सजती हैं,,
झरने के नगमो के मध्य नदियाँ कलरव करती हैं।।
हरे पत्तियों के शोर भी मधुर संगीत गुनगुनाते हैं,,
सर्रसर्राति हवाओं के साथ पक्षियों के स्वर चहचहाते हैं।।
वर्षा ऋतु के आगमन पर प्रकृति अनोखी छवि प्रस्तुत करती है,,
अपने विशेष आकर्षण से संसार में नये उमंग भरती है।।
इसी तरह से आषाढ़ का महिना हमें नवीन प्रकृति दिखला रहा,,
बीतता हुआ आषाढ़ का महिना हमें शीतलता पहुँचा रहा।।
सूखे हुए प्रकृति को फिर से हँसना सीखा रहा,,
बीतता हुआ आषाढ़ का महिना हमें शीतलता पहुँचा रहा।।