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8 Jul 2025 · 1 min read

कविता

जीवन
———

जीवन
पाप -पुण्य का संगम है
पाप को छोड़
पुण्य ग्रहण करते जाइए
जीवन सुखद बनाते जाइए ।

जीवन
फूल -कांटों का संगम है
कांटों को छोड़
फूल चुनते जाइए
जीवन सुखद बनाते जाइए ।

जीवन
सुख -दु:ख का संगम है
दुःख को छोड़
सुख ग्रहण करते जाइए
जीवन सुखद बनाते जाइए ।

– मुकेश कुमार ऋषि वर्मा
ग्राम रिहावली, डाक घर तारौली गूजर, फतेहाबाद, आगरा, उत्तर प्रदेश 283111
9627912535

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